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[11-20] < निर्गमन ३०:१-१० > धूप वेदी



< निर्गमन ३०:१-१० >

“फिर धूप जलाने के लिये बबूल की लकड़ी की वेदी बनाना। उसकी लम्बाई एक हाथ और चौड़ाई एक हाथ की हो, वह चौकोर हो, और उसकी ऊँचाई दो हाथ की हो, और उसके सींग उसी टुकड़े से बनाए जाएँ। और वेदी के ऊपरवाले पल्‍ले और चारों ओर के बाजुओं और सींगों को चोखे सोने से मढ़ना, और इसके चारों ओर सोने की एक बाड़ बनाना। और इसकी बाड़ के नीचे इसके आमने-सामने के दोनों पल्‍लों पर सोने के दो दो कड़े बनाकर इसके दोनों ओर लगाना, वे इसके उठाने के डण्डों के खानों का काम देंगे। डण्डों को बबूल की लकड़ी के बनाकर उनको सोने से मढ़ना। और तू उसको उस परदे के आगे रखना जो साक्षीपत्र के सन्दूक के सामने है, अर्थात् प्रायश्‍चित्त वाले ढकने के आगे जो साक्षीपत्र के ऊपर है, वहीं मैं तुझ से मिला करूँगा। और उसी वेदी पर हारून सुगन्धित धूप जलाया करे; प्रतिदिन भोर को जब वह दीपक को ठीक करे तब वह धूप जलाए, और गोधूलि के समय जब हारून दीपकों को जलाए तब धूप जलाया करे, यह धूप यहोवा के सामने तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में नित्य जलाया जाए। उस वेदी पर तुम किसी अन्य प्रकार का धूप न जलाना, और न उस पर होमबलि और न अन्नबलि चढ़ाना; और न उस पर अर्घ देना। हारून वर्ष में एक बार इसके सींगों पर प्रायश्‍चित्त करे; और तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में वर्ष में एक बार प्रायश्‍चित्त के पापबलि के लहू से इस पर प्रायश्‍चित्त किया जाए; यह यहोवा के लिये परमपवित्र है।”



धूप की वेदी प्रार्थना का स्थान था


धूप वेदी बबूल की लकड़ी से बनी थी, और वह समकोण आकर की थी, उसकी लम्बाई और चौड़ाई एक हाथ (४५ सेंटीमीटर: १.५ फीट) थी, और उसकी उंचाई २ हाथ थी। पवित्र स्थान में राखी गई धूप वेदी को पूरी तरह से सोने से मढ़ा गया था, और उसके चारो ओर सोने की बाड़ बनाई गई थी। वेदी को उठाने के लिए इस्तेमाल हुए डंडो को रखने के लिए इसकी बाड़ के निचे सोने के चार कड़े लगाए गए थे। धूप की इस वेदी पर, केवल अभिषेक का पवित्र तेल और सुंगंध द्रव्य का ही इस्तेमाल होता था (निर्गमन ३०:२२-२५)। 

जहाँ धूप वेदी को रखा गया था वहाँ परमेश्वर को प्रार्थना की जाति थी। लेकिन हम धूप वेदी के पास प्रार्थना करे उससे पहले, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए की क्या हम परमेश्वर को प्रार्थना करने के लिए योग्य है या नहीं। जो लोग पवित्र परमेश्वर से प्रार्थना करने के लिए योग्य बनना चाहते है उन्हें पहले अपने पापों को साफ़ करने के द्वारा पापरहित बनना होगा। ऐसा करने के लिए, व्यक्ति को होमबलि और हौदी के विश्वास के द्वारा अपने पापों को साफ़ करना चाहिए।

परमेश्वर पापियों की प्रार्थना नहीं सुनता (यशायाह ५९:१-३)। क्यों? क्योंकि परमेश्वर केवल उन लोगों की प्रार्थना सुनता है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास के द्वारा अपने सारे पापों से शुध्ध हुए है। क्योंकि परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सत्य के द्वारा हमारे सारे पापों को साफ़ किया है। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर केवल धर्मी लोगों की प्रार्थना सुनना पसंद करता है (भजन संहिता ३४:१५, १ पतरस ३:१२)।

 


सारे मनुष्यों का स्वभाव और वास्तविकता


जब हम नजदीक से देखते है, तो हम देख सकते है की आपके और मेरे समेत सारे मनुष्य मूलरूप से पापी बिज के रूप में पैदा हुए है, और इसलिए वे सब पाप करते है। प्रत्येक व्यक्ति कुकर्म करनेवालों का बीज है। क्योंकि लोग मूलरूप से पाप के साथ पैदा हुए है, इसलिए वे बुरे काम करते हुए अपना जीवन जीते है। आप अपने बारे में सोचे, की आप क्या है। हम परमेश्वर के सामने स्वीकार कर सकते है की हम दुष्ट थे जो नरक में जाने के योग्य थे। सबसे ऊपर, जब हम परमेश्वर के सामने अपने कार्यों का न्याय करते है, तब हमें समझ में आता है की परमेश्वर की व्यवस्था जो घोषित कराती है की पाप की मजदूरी तो मृत्यु है उसके मुताबिक़, हम उसके धर्मी न्याय से बच नहीं सकते।

क्योंकि मनुष्य के मन से बुरे बुरे विचार, हत्या, व्यभिचार, अभिमान और मूर्खता निकलती है, और जब भी मौक़ा मिलता है तब वे यह काम करते है (मरकुस ७:२१-२७)। मनुष्य का मन जो मूलरूप से कुकर्म करनेवालों के बिज से पैदा हुआ है और जब भी परिस्थिति अनुमति देती है और मौक़ा मिलता है तब पाप करता है, वह कैसे परमेश्वर के सामने शर्मनाक नहीं हो सकता है? मनुष्य के द्वारा निर्मित प्रयासों से यह असंभव है। लेकिन केवल एक मात्र विश्वास है जो हमें परमेश्वर के सामने शर्मनाक नहीं करता, और वो यहाँ है। हम सब को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बने सत्य को जानना और विश्वास करना चाहिए, ऐसा सत्य जो हमें हमारे पापों से शुध्ध होने के लिए सक्षम बनाता है और फिर बिना शर्म के परमेश्वर के सामने खड़े होने के योग्य बनाता है। उसी रूप से, हम सब को पानी और आत्मा के सुसमाचार की जरुरत है।

हममें से कोई भी इस सत्य को नकार नहीं सकता की हम सब हमारे पापों की वजह से नरक में बंधे हुए थे और इसका स्वीकार करते है। और वे लोग जो परमेश्वर के सामने स्वीकार करते है की वे नरक में बंधे हुए है, उनके लिए हृदय में परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार पर विश्वास करना कठिन नहीं है। जब हम विश्वासयोग्यता और सच्चाई से परमेश्वर का सामना करते है, तब हम हमारे कपटी हृदय को उससे छिपा नहीं सकते, इसलिए हम परमेश्वर की धार्मिकता के न्याय को स्वीकार करते है। प्रत्येक व्यक्ति एक ऐसे स्थान पर है की वे अपने पापों के लिए परमेश्वर के धर्मी न्याय का दण्ड सहेंगे।

परमेश्वर का धर्मी न्याय जो घोषित करता है की पाप की मजदूरी तो मृत्यु है वह ऐसी व्यवस्था नहीं है जिससे साए पापी अपनी खुद की सोच और धार्मिक विश्वास से बच जाएंगे। क्योंकि परमेश्वर की व्यवस्था विस्तृत, चौकस, और न्यायी है इसलिए जो कोई भी इसके सामने खड़ा रहता है उनसे यह कबूल करवाती है की वे अपने पापों के लिए नरक में बंधे हुए है। सारे पापी यह समझ चुके है की वे अपने छोटे से छोटे पाप के लिए भी परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकते।

इसलिए, हमें एक उद्धारकर्ता की जरुरत है जो हम सब को पाप से छूडाए, और हमें यह ढूँढना है की वह उद्धारकर्ता कौन है। यह यीशु मसीह है, पूरी मनुष्यजाति का उद्धारकर्ता। यह वो उद्धारकर्ता है जो इस पृथ्वी पर आया, जिसने जगत के सारे पापों को उठाने के लिए यूहन्ना से बपतिस्मा लिया, जिसने क्रूस पर चढ़कर और अपना लहू बहाकर सारे पापियों के अपराधों का दण्ड सहा, और जिसने इस प्रकार हम सब को हमारे सारे पापों से बचाया।

हम सब को यह गलतफहमी है की पाप की माफ़ी को प्राप्त करना बहुत ही कठिन है। वास्तव में, हम सोचते थे की हम केवल बाइबल को पूरी तरह से जानने के द्वारा ही बच सकते है, या हमारे उद्धार के लिए कुछ अच्छे कर्मो की जरुरत है। लेकिन परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार का सत्य बिलकुल अलग है। इस उद्धार के सत्य ने परमेश्वर की व्यवस्था के सामने हमारे विवेक की जांच करने के द्वारा, हमारे हृदय में पाए जानेवाले सारे पापों का स्वीकार करने के द्वारा, और पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हमारे पापों से बचने के मार्ग को खोला और हमें यह मार्ग दिखाया। यह सत्य मिलापवाले तम्बू के द्वार में पहले से प्रगट हुआ था।

मनुष्यजाति का उद्धार नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़ें के द्वारा परिपूर्ण कीमती उद्धार के सत्य के द्वारा आता है। इस सत्य पर विश्वास करने के द्वारा की प्रत्येक व्यक्ति एक ही बार में हमेशा के लिए पाप की माफ़ी पा सकता है। ऐसा करने के लिए, प्रत्येक व्यक्ति को यह स्वीकार करना चाहिए की वे अपने पापों की वजह से नरक में बंधे हुए है और नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए, इस प्रकार वे एक ही बार में उनके पापों की माफ़ी प्राप्त करेंगे। परमेश्वर ने हमें जो सुसमाचार दिया है वह वो सुसमाचार है नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में निहित सत्य के सुसमाचार में पाया जाता है।

सब लोगों को सत्य के इस सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए, क्योंकि यदि वे इस सुसमाचार में निहित सत्य पर विश्वास नहीं करते, तो वे अपने पापों से मुक्त नहीं हो सकते। लेकिन जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार से परमेश्वर के द्वारा परिपूर्ण उद्धार के इस सत्य पर विश्वास करते है वे अपने सारे पापों से उद्धार पाने और परमेश्वर की निज संतान बनने के योग्य है। उसी रूप से, ऐसा व्यक्ति बनने के लिए जो परमेश्वर के सामने जा सके और प्रार्थना कर सके, हमें सबसे पहले पानी और आत्मा के सत्य पर विश्वास करना चाहिए, जो पाप की माफ़ी का सुसमाचार है। जब हम सच्चे सुसमाचार को जानने और अपने हृदय में उस पर विश्वास करने के द्वारा हमारे सारे पापों से उद्धार पाते है, उसके बाद हम परमेश्वर से प्रार्थना करने के योग्य बनते है। जो हमें परमेश्वर से प्रार्थना करने के लिए सक्षम बनाए ऐसा विश्वास हम केवल परमेश्वर के द्वारा दिए हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार को हमारे हृदय में विश्वास करने के द्वारा ज=ही प्राप्त कर सकते है।

मिलापवाले तम्बू के द्वारा के परदे में प्रगट हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के विश्वास के बगैर परमश्वर से प्रार्थना करना गलत है। ऐसा विश्वास परमेश्वर की निंदा और मज़ाक उड़ाने के पाप के समान है। मिलापवाले तम्बू में प्रगट हुए सत्य को हमारे हृदय में विश्वास करने से इनकार करने के द्वारा हम कैसे परमेश्वर के दुश्मन बनते है?

जब आप यीशु मसीह पर विश्वास करने से मना करते है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य के द्वारा आया, तो यह आपके लिए परमेश्वर का दुश्मन बनने का छोटा रास्ता है। यह एक भयानक अविश्वास का कार्य है जो परमेश्वर के विरुध्ध में खड़ा होता है। ऐसी आत्माए जी निरंतर परमेश्वर की पवित्रता को तुच्छ जानने का पाप कराती है वे वो आत्माए है जो परमेश्वर ने उनके लिए परिपूर्ण किया उस उद्धार पर विश्वास नहीं कराती लेकिन खुद के विचारों और खुद के तरीकों के अनुसार विश्वास कराती है। ऐसी आत्माए वो है जो खुद को अंजीर के पत्तो में लपेटती है जिसे “पाखंडी” कहा जाता है, जो परमेश्वर के प्रेम और दया को तुच्छ जानती है।

लेकिन आपको यह समझना चाहिए की ये लोग खुद के हृदय को भ्रमित कर सकते है, लेकिन परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकते। ऐसे अविश्वास वाले लोग परमेश्वर की धर्मी व्यवस्था के द्वारा अपने पापों के लिए भयानक दण्ड को सहेंगे। क्यों? क्योंकि उन्होंने न तो पानी और आत्मा के सुसमाचार को जाना जिससे परमेश्वर ने उनके पापों को मिटा दिया है और न ही इस सुसमाचार पर विश्वास किया।

जब हमारा विवेक हमारी ही दृष्टि में गंदा है, तो हम अपने पापों को परमेश्वर के सामने कैसे छिपा सकते है? यह असंभव है! जो कोई भी अपने पापों को छिपाने की कोशिश करता है वह परमेश्वर के प्रेम और दया से बहार हो जाएगा। जो लोग खुद के हृदय को भ्रमित करते है वे अन्त में शैतान के दुष्ट सेवक बनेंगे जो परमेश्वर को और अपने साथी मनुष्यों को धोख़ा देते है। वे किसी भी प्रकार से अपनी आँखों पर पट्टी लगाने के द्वारा परमेश्वर को धोख़ा देंगे यह विचार उनके अहंकारी विचार से निकला हुआ उनके घमंड का प्रतिबिम्ब है। वास्तव में, जो लोग अपने खुद के विचार पर निर्भर होते है वे वो लोग है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार को चुनौती देते है, और जो अपनी खुद की इच्छा से शैतान के सेवक बनते है।

लोगों को यह समझना चाहिए की भले ही वे खुद के हृदय को धोका दे सकते है, लेकिन वे कभी भी परमेश्वर को धोख़ा नहीं दे सकते। और उन्हें परमेश्वर के वचन के मुताबिक़ विश्वास करने के लिए अपने मन को बदलना चाहिए। कैसे सारे लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास किए बगैर अपने पापों को साफ़ कर सकते है? जैसे लिखा है की पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, इसलिए कोई भी पापी परमेश्वर के सामने खुद के हृदय को धोख़ा देता है वह कभी भी परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकता। यदि हम परमेश्वर की व्यवस्था का स्वीकार करे, तो यह स्पष्ट होता है की हम सब हमारे पाप के लिए नरक में बंधे हुए है। उसी रूप से, जो लोग परमेश्वर के सामने आना चाहते है उन्हें मिलापवाले तम्बू के द्वार में प्रगट हुए सुसमाचार पर विश्वास के द्वारा उद्धार पाना चाहिए।

हालाँकि, क्योंकि बहुत लोग यह सत्य को समझने में विफल हुए है की वे अपने पापों की वजह से दण्ड पाएंगे, इसलिए वे अपने हृदय में उद्धार के सुसमाचार को स्वीकार करने में भी विफल हुए है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य के द्वारा आया है, और परिणाम स्वरुप, वे सब नरक की ओर जा रहे है। वे पहले से मसीही है या नहीं इस बात की परवाह किए बिना, जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते वे भी यही दण्ड को प्राप्त करेंगे। उसी रूप से, हमें परमेश्वर के सामने खुद के विवेक को धोख़ा नहीं देना चाहिए, लेकिन हमारे हृदय में पानी और आत्मा के सुसमाचार को मानना चाहिए, और इस सत्य के सुसमाचार का स्वीकार और विश्वास करना चाहिए।



हमें सत्य के वचन पर विश्वास करने के द्वारा हमारे पापों को साफ़ करना चाहिए


लोगों के पास दो विवेक है: पहला देह का विवेक, और दूसरा विश्वास का विवेक जो सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करता है। हमें इन दोनों विवेक के प्रति इमानदार रहना चाहिए, लेकिन इन दोनों में से जो सत्य के सुसमाचार को स्वीकार करता है ऐसा विवेक पाने से हमें विफल नहीं होना है। हमें परमेश्वर के वचन के सामने खुद के विवेक की जांच करनी चाहिए; विश्वास करना चाहिए की यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों का स्वीकार किया, क्रूस पर दण्ड सहा, और इस प्रकार हमें बचाया; और इस विश्वास के द्वारा हमारे विवेक का पाप साफ़ करना चाहिए। मुझे इस बात का गुस्सा आता है की जब यह सत्य पूरी तरह से स्पष्ट है फिर भी ऐसे कई लोग है जो जो सत्य के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते।

हमारे विवेक को शुध्ध करने के लिए विश्वास का क्रम है। पहला, हमें हकीकत को स्वीकार और सुनिश्चित करना चाहि की हम नरक में बंधे हुए है, और दूसरा, हमें अपने हृदय में विश्वास करना चाहिए की हमारा उद्धारकर्ता इस पृथ्वी पर आया, हमारे पापों के लिए यूहन्ना से बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, मृत्यु से जीवित हुआ, और इस प्रकार हमें हमारे पाप से बचाया। पापियों को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर अपने विश्वास के द्वारा अपने अपराधों से उद्धार पाना चाहिए और अनन्त जीवन प्राप्त करना चाहिए।

हमें हमारे पाप से उद्धार प्राप्त करना चाहिए यह हकीकत के बावजूद, लोग नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा परिपूर्ण पाप की माफ़ी को जानने के बावजूद भी कुछ लोग विश्वास नहीं करते। वे ऐसा कैसे कर सकते है? निश्चित ही वे अपने अविश्वास के सारे परिणाम के जिम्मेदार होंगे। यदि हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य को जानते है लेकिन विश्वास नहीं करते, तो हम अभी भी पापी है, और यदि हम अभी भी पापी है, तो क्या परमेश्वर की व्यवस्था के मुताबिक़ हमारा न्याय नहीं होगा? हममें से प्रत्येक, पुरुष या स्त्री, प्रत्येक व्यक्ति को अपने हृदय में उद्धार के सत्य पर विश्वास करने के द्वारा उद्धार पाना था जो परमेश्वर के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य के द्वारा परिपूर्ण किया है।

लोगों के पास ऐसा विश्वास होना चाहिए जो उन्हें उनके पापों से बचाए। उनके पास ऐसा विश्वास होना चाहिए जो केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करे। क्या आप नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सुसमाचार पर विश्वास करते है की प्रभु ने बपतिस्मा लेकर हमारे पापों को उठाया और क्रूस पर अपने लहू को बहाने के द्वारा हमें बचाया है? जब आप सबसे पहले खुद के बारे में सोचते है तो क्या आप इस हकीकत का स्वीकार करते है की वास्तव में आप नरक के लिए नियोजित थे? क्या आप समझते है की भले ही हम नरक के लिए बंधे हुए है उसके बावजूद भी प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य से बचाया है?

आपको समझना चाहिए की हमारे पापों को दूर करने के लिए प्रभु इस पृथ्वी पर आए, बपतिस्मा लिया, और अपना लहू बहाया। आपके और मेरे पापों को मिटाने के लिए, हमारे प्रभु मनुष्य की देह में इस पृथ्वी पर पैदा हुए, ३० साल की उम्र में यरदन नदी में यूहन्ना से बपतिस्मा लेने के द्वारा एक ही बार में सारी मनुष्यजाति के पापों को अपनी देह पर ले लिया, और क्रूस पर चढ़ने और अपना लहू बहाने के द्वारा एक ही बार में पाप के दण्ड को सहा। एक ही बार में परमेश्वर ने विश्वास करनेवालों के पापों को माफ़ किया।

हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य पर विश्वास करने के द्वारा हमारे पापों से उद्धार पा सकते है। हमें इस सत्य के द्वारा ह=जाँच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की क्या वास्तव में हमारा उद्धार हुआ है या नहीं। हमारे पास यीशु मसीह पर विश्वास करनेवाला विश्वास होना चाहिए जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से उध्दारकर्ता के रूप में आया था। जैसे बाइबल कहती है, “क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विश्‍वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुँह से अंगीकार किया जाता है” (रोमियों १०:१०)। रोमियों १०:१७ भी यह बताता है की, “अत: विश्‍वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है।”

मसीह के यह वचन हमसे कहते है की हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से परिपूर्ण हुए उद्धार पर विश्वास करने से बचे है। पाप की माफ़ी कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमारे खुद के विचारों पर विश्वास करने से प्राप्त की जा सकती है, लेकिन यह एक ऐसी चीज है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से आए उद्धार पर हमारे हृदय में विश्वास करने से आता है। जो विश्वास हमें वास्तव में पाप से छूटकारा दे सकता है वह है पानी और आत्मा के सुसमाचार का विश्वास। तो फिर क्या हमें इस सत्य पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए? हाँ बिलकुल! इसलिए सत्य से अपनी कमर कसकर हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना और विनती करनी चाहिए (इफिसियों ६:१४, १८)। लेकिन फिर यह सत्य क्या है?

यह सुसमाचार है जो हमसे कहता है की हमारा प्रभु हमें बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आया, ३० साल की उम्र में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया, जगत के सारे पापों को उठाया, अपने दोनों हाथ और पैरो में किले मार कर उसे क्रूस पर चढ़ाया गया, उसके ऊपर थूंका गया, अपना लहू बहाया, और इस प्रकार हमारे पापों को साफ किया। हमें यह अंगीकार करना चाहिए की इस सत्य पर हमारे विश्वास के कारण हमारे पाप माफ़ हुए है। हमारे प्रभु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस के लहू के द्वारा जगत के पापों का दण्ड सहकर हमें बचाया है।

“प्रभु, आपने मुझसे इतना प्रेम किया की अपने मुझे परमेश्वर की संतान बनाया।” इस रीति से हमें हमारे विश्वास का अंगीकार करना चाहिए। जब हमने केवल पाप ही पाप किए थे, तब भी हमारे प्रभु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ाए जाने के द्वारा हमारे पापों को दूर करके हमें स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य बनाया। हम सब को इस सत्य पर विश्वास करना चाहिए और अनन्त जीवन प्राप्त करना चाहिए।

इस सत्य पर विश्वास न करने के लिए आपके पास क्या करण है? मेरे लिए, यदि प्रभु ने मुझे मेरे पापों से बचाने के लिए बपतिस्मा नहीं लिया होता तो भी मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं होता, लेकिन फिर भी मेरे खातिर वास्तव में उसने बपतिस्मा लिया, अपना लहू बहाया, और इस प्रकार मुझे मेरे पापों से बचाया। और इसलिए मैं विश्वास करता हूँ! हम सब के पास ऐसा कोई कारण नहीं है की हम इस सुसमाचार पर विश्वास न करे। यह स्पष्ट है की यदि पापी पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते, तो निश्चित ही उन्हें नरक में धकेल दिया जाएगा। लेकिन मैं चाहता हूँ की आपमें से हर एक व्यक्ति नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े क सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पाप से उद्धार पाए।

एक ऐसा समय था जब मैं यीशु पर विश्वास करने के बावजूद भी पापी था। एक अच्छा मसीही बनने के लिए, स्वर्ग के निचे मैंने सारी शर्म छोड़ने का कठिन प्रयास किया।लेकिन मेरी इच्छा से विपरीत, मैं समय समय पर पाप करने लगा; एकमात्र सांत्वना यह थी की जब मैं अपने आप को किसी दुसरे के साथ तुलना करता था तब मैं सोचता था की मैं उनसे बहेतर हूँ। हालाँकि, मेरा विवेक मुझसे कहता था की मेरे अन्दर अभी भी पाप है, और जैसे की परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार पाप की मजदूरी मृत्यु है, इसलिए मैं एक ऐसा व्यक्ति था जो अपने अपराधों की वजह से नरक के लिए बंधा हुआ था।

मेरे सुस्त और विधि सम्मत जीवन के दशक बाद, मैं आत्मिक तौर पर तक़रीबन मर चुका था। हालाँकि, परमेश्वर ने मुझे उस अनुग्रह के द्वारा प्रबुध्ध किया की यीशु मसीह ने मेरे लिए बपतिस्मा लिया था और मेरे खुद के पापों को उठाया था। उसने केवल मेरे पापों को ही नहीं उठाया, लेकिन इस जगत के प्रत्येक लोगों के सारे पापों को भी उठाया था। फिर वह इन पापों को क्रूस तक लेकर गया और क्रूस पर चढ़कर मरने के द्वारा इन पापों के दण्ड को सहा, मृत्यु से फिर से जीवित हुआ, और इस प्रकार मेरा सच्चा उद्धारकर्ता बना जो आज भी जीवित है। जब मैंने इस सत्य के सुसमाचार को जाना, तब मैंने इस पर विश्वास किया। और यह विश्वास करने के द्वारा की यीशु मसीह अपने बपतिस्मा और क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा मेरा उद्धारकर्ता बना है, मेरे सारे पाप साफ़ हो गए। मैंने विश्वास के द्वारा मेरे हृदय में पाप की माफ़ी को प्राप्त किया है।

यह इसलिए नहीं हुआ की मैं परमेश्वर के वचन के बारे में अच्छी तरह से जानता था इसलिए मैंने पाप की माफ़ी प्राप्त की, लेकिन मेरे पाप की माफ़ी इसलि हुई क्योंकि मैं खुद के विवेक के पापों को जनता था, इन पापों को यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाला, और मेरे हृदय में विश्वास किया की मेरे पापों की कीमत चुकाने के लिए यीशु ने क्रूस पर दण्ड सहा। इसी के कारण मैंने इस पाप की माफ़ी को पाया है जो मैं सुसमाचार का प्रचार करते अपने जीवन को जी रहा हूँ। आप और मैं एक जैसे है; वास्तव में हमारे बिच कोई अन्तर नहीं है।

आपके जैसे ही, मैं भी नरक की ओर बढ़ रहा था, और ठीक आप की तरह, मैंने भी पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी पाई है। इसलिए मैं प्रभु को अपना धन्यवाद देता हूँ। क्योंकि इस रीति से पानी और आत्मा के द्वारा पाप की माफ़ी पाने से हमारे पास विश्वास का विवेक है इसलिए अब हम परमेश्वर के पास उनकी संतान के रूप में जाने और उससे प्रार्थना करने के लिए सक्षम।

जैसे बाइबल हमें बताती है की धूप वेदी के लिए अभिषेक के तेल और सुंगंधित द्रव है, वैसे यीशु ने हमें सत्य के सुसमाचार के द्वारा हमारे पापों को साफ करने के द्वारा हमें शुध्ध बनाया है। पुराने नियम के प्राचीन युग में, इस्राएल के लोगों को जैसे परमेश्वर ने आदेश दिया है ठीक उसी प्रकार यह सामग्री बनानी पड़ती थी और वेदी पर जलानी पड़ती थी। इसलिए पवित्र स्थान के अन्दर, हरदिन धूप को जलाया जाता था और उसकी सुंगंध वहाँ से उठती थी। इस धूप का मतलब है परमेश्वर से प्रार्थना करना।

नए नियम के युग में, आपको पवित्र स्थान में इस धूप को जलाने के लिए, आपको सबसे पहले सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए और अपने हृदय में पाप की माफ़ी को प्राप्त करना चाहिए। दुसरे शब्दों में, सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा व्यक्ति प्रार्थना के धूप को जला सकता है। और किस तरीके से हम जैसे पुराने नियम के समय में धूप को जलाया जता था वैसे जला सकते है? अब मिलापवाले तम्बू के होमबलि की वेदी और धूप वेदी जैसे पात्र हमारे सामने नहीं है, तो फिर आप और मैं कैसे धूप को वेदी पर जला सकते है? हम प्रार्थना के धूप को विश्वास से जला सकते है, क्योंकि यीशु मसीह ने हमारे पापों की मिटा दिया है और हमें उद्धार दिया है। क्योंकि हमारे हृदय विश्वास के द्वारा शुध्ध हुए है जब हमने पाप की माफ़ी को प्राप्त किया था, इसलिए अब हम हमारी उत्कट प्रार्थनाओं से धूप को जला सकते है जो परमेश्वर के पास ऊँचे में चढ़ता है।

हम विश्वास करते है की पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे हृदय से विश्वास करने के द्वारा हमारे पाप यीशु मसीह पर पारित हुए है, और यीशु मसीह ने हमारी जगह पाप के दण्ड को सहा है। इस प्रकार आपके और मेरे हृदय शुध्ध हुए है। हमारे हृदय के सारे पाप यीशु पर डाले गए है तब से विश्वास के द्वारा हमारे हृदय सम्पूर्ण रीति से शुध्ध हुए है। यदि आपके पाप यीशु ने यूहन्ना से जो बपतिस्मा लिया था उसके द्वारा उसके ऊपर पारित किए गए थे, तो एक ही बार में आपके सारे पापों को साफ़ किया गया है और दूर किया गया है अब आपके हृदय में कोई भी पाप नहीं बचा है। क्योंकि हमारे पाप सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा दूर हुए है शुध्ध हुए है, इसलिए अब हम पवित्र परमेश्वर के पास जा सकते है और उससे मदद मांग सकते है। हम परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते है यह हमारे विश्वास का पुरस्कार है जो हमने निर्णायक रूप से सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी पाई है, अब वह हमारे शुध्ध हृदय की पृष्ठभूमि है।

भाइयों और बहनों, धूप की वेदी के पास जाओ और निरंतर प्रार्थना करो। “पिता, कृपया मेरी मदद करे। मैं ऐसी परिस्थिति में फसा हूँ, और मुझे यह करने की आवश्यकता है। पिता, मैं सच्चे सुसमाचार को फैलाना चाहता हूँ और धर्मी जीवन जीना चाहता हूँ। मैं उन लोगों के लिए धर्मी जीवन जीना चाहता हूँ जिन्होंने पाप की माफ़ी पाई है। और मैं भी धार्मिकता के फल देना चाहता हूँ। मुझे आप में विश्वास दीजिए। मैं आपकी इच्छा के मुताबिक़ अपना जीवन जीना चाहता हूँ।” इस तरह, व्यक्ति की जरूरतों के बारे में मांगना ही प्रार्थना है। यह परमेश्वर की धार्मिकता के अनुसार उसकी मदद माँगने के बारे में है।

हो सकता है आपके पास बहुत सारा जोश और इच्छाए हो। क्योंकि हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे विश्वास के द्वारा धर्मी बने है, इसलिए अब हमारे लिए प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर से सबकुछ मांगना सम्भव है। जो लोग परमेश्वर की मदद प्राप्त करने के लिए उससे प्रार्थना कर सकते है वे बहुत आनंदित है। अब हम सब ने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी पाई है, इसलिए कोई संदेह नहीं है की हम सब परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते है।

जिन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर अपने विश्वास के द्वारा अपने हृदय में पाप की माफ़ी प्राप्त की है वे पवित्र परमेश्वर के पास जाकर उसकी मदद माँगने के लिए सक्षम है। और सारे नया जीवन पाए हुए विश्वासी अनिवार्य रूप से और स्वाभाविक रीति से अपने जीवन में पिता से मदद माँगने के लिए प्रार्थना कर सकते है, जिसे बच्चा जब मुसीबत में होता है तो अपने मातापिता से मदद माँगने के लिए रोता है। जिस विश्वास ने उन्हें पाप की माफ़ी दी है उस विश्वास ने न केवल उन्हें परमेश्वर को पिता कहने के लिए योग्य बनाया है, लेकिन उन्हें उनके जीवन में परमेश्वर की संतान के रूप में उससे मदद माँगने के लिए भी योग्य बनाया है। क्योंकि वास्तव में परमेश्वर हमारे विश्वास के द्वारा हमारे पिता बने है, इसलिए हम हमारी जरुरत के मुताबिक उससे मदद माँग सकते है।

अवश्य ही मैं नहीं जानता हूँ की आपने पाप की माफ़ी पाई उसके बाद आपकी व्यक्तिगत प्रार्थना क्या है और कैसे उसे परमेश्वर ने पूरा किया है। लेकिन मैं जो जानता हूँ वह यह है की जब हम परमेश्वर से उसकी कलीसिया में जुड़ने के लिए या सुसमाचार का प्रसार करने के लिए प्रार्थना करते है, तब वह निश्चित रूप से हमारी प्रार्थना का उत्तर देता है। शुरू में, प्रत्येक व्यक्ति अपनी दैहिक जरुरत के लिए प्रार्थना करता है। लेकिन पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा, हमें यह समझ में आया है की हमें तत्काल रूप से दूसरों के लिए प्रार्थना करने की आवश्यकता है, और इस प्रकार हम दूसरों के उद्धार के लिए और पूरी दुनिया में पानी और आत्मा के सुसमाचार को फैलाने के लिए प्रार्थना करने के लिए खुद को समर्पित करते है। क्यों? क्योंकि नया जन्म पाए हुए संतों की प्राथना पवित्र आत्मा के द्वारा संचालित होती है। प्रभु ने हमसे कहा है, “इसलिए पहले तुम परमेश्वर के राज्य और उसके धर्म की खोज करो” (मत्ती ६:३३)।

लेकिन नया जन्म पाए हुए लोगों में, जो लोग अभी भी आत्मिक रूप से अपरिपक्व है वे नहीं जानते है की सही चीज के लिए प्रार्थना कैसे करनी है, क्योंकि उन्होंने अभी तक उन्होंने परमेश्वर के द्वारा उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर का अनुभव नहीं किया है। क्योंकि वे अभी भी नहीं जानते की परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास कितना सामर्थी है। ऐसे थोड़े विश्वास वाले लोग नहीं जानते की उनकी प्रार्थना का उत्तर मिलेगा या नहीं और उसके अतिरिक्त वे संदेह से त्रस्त है।

उसी रूप से, उन्हें उन लोगों के साथ मिलकर प्रार्थना करनी चाहिए जिन्होंने उनसे पहले विश्वास किया है। जिनका विश्वास नया होता है वे परमेश्वर से प्रार्थना करने में संकोच करते है। और जब वे प्रार्थना करते है, तब वे केवल वही माँगते है जो वो चाहते है – “मुझे दीजिए, मुझे दीजिए, मुझे दीजिए।” लेकिन यदि विश्वास में नए लोग परमेश्वर में बड़े विश्वास के बिना कलीसिया के साथ जुड़ते है, तब भी वे लोग सिख सकते है की सच्ची प्रार्थना क्या है, क्योंकि कलीसिया में उनके विश्वास के पुरखे परमेश्वर की धार्मिकता के लिए प्रार्थना करते है। क्योंकि पवित्र आत्मा कलीसिया के साथ जुड़े हुए लोगों को प्रार्थना का विशवास भी देता है, इसलिए वे धीरे धीरे परमेश्वर की धार्मिकता के लिए प्रार्थना करने लगते है। “धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है” (याकूब ५:१६)।

नया जन्म पाए हुए लोगों की प्रार्थना से जिनके पास परमेश्वर से प्रार्थना करने का अधिकार है उनके प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। परमेश्वर के ऊपर विश्वास करनेवालों की प्रार्थना वास्तव में उससे उत्तर पाती है। जब लोग परमेश्वर से प्रार्थना करते है, और पिता से उनकी प्रार्थना का उत्तर पाने के लिए उन्हें सबसे [पहले विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर उनका खुद का पिता है, और वह उनके विश्वास के आधार पर उन्हें उत्तर देता है। उसी रूप से, जब प्रार्थना के पुरखे एक साथ जुड़ते है और उनके नक़्शे कदम पर चलने वालों के लिए और सुसमाचार के प्रसार के धर्मी कार्य के लिए प्रार्थना करते है, तब वे महान कार्य का अनुभव करते है। यदि आप अपने विश्वास के पुरखे के बगल में खड़े है जो परमेश्वर पर विश्वास करता है, तो आपको आपके विश्वास के लिए बड़ी मदद मिलेगी। क्योंकि परमेश्वर जानता है की हमें न केवल उद्धार के अनुग्रह के लिए लेकिन जीवन के दुसरे हिस्सों में भी मदद की आवश्यकता है, इसलिए वह हमारी प्रार्थना का उत्तर देता है। इसी लिए हम सब को उस विश्वास की जरुरत है जो परमेश्वर की कलीसिया के साथ जुड़ा हुआ है।

जब हम परमेश्वर को प्रसन्न करनेवाली चीजों के लिए प्रार्थना करते है, तब हमारा विश्वास हमें बहुत ही प्रोत्साहित करता है। जैसे आत्मिक बच्चे उत्साह से बार बार प्रार्थना करते है और ऐसी प्रार्थना को खुद की और परिपक्व प्रार्थना के रूप में लेता है तब हम भी हमारी समस्याओं के लिए परमेश्वर पिता के पास आ सकते है। जो लोग ऐसा करने के द्वारा सच में परमेश्वर पर विश्वास करते है वे बाद में वास्तविक सत्य का अनुसरण करते हुए विश्वास से चलते है। जैसे बाइबल हमें बताती है की धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, वैसे वे लोग केवल खुद के लिए नहीं जीते, लेकिन दूसरी आत्माओं के उद्धार के लिए जीते है।

हम परमेश्वर से प्रार्थना करने की योग्यता कैसे प्राप्त कर सकते है? हम परमेश्वर के द्वारा दिए गए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वार प्राप्त कर सकते है। जिन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करके पाप की माफ़ी पाई है केवल उन्हें ही निडरता से परमेश्वर पिता को प्रार्थना करने की योग्यता दी गई है। प्रार्थना करने की योग्यता प्राप्त करना परमेश्वर से विश्वास की बड़ी आशीष प्राप्त करना है।

इस गृह पर मसीही विश्वासियों के बिच, कितने ऐसे लोग है जो सोचते है की वे ऐसे विश्वास से प्रार्थना करने के लिए योग्य है? बहुत कम! परमेश्वर से बहुत बड़ी आशीष के उपहार में से एक है, सबसे पहले हमें ऐसे विश्वास को पाना है जिसने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य के द्वारा हमारे पापों से बचाया है। और दूसरा है की हमने परमेश्वर की संतान के रूप में उससे प्रार्थना करने की सामर्थ्य और योग्यता पाई है; और तीसरी, हमने ऐसे विश्वास को प्राप्त किया है जिसने हमें परमश्वर के कार्यकर्ता के रूप में जीवन जीने की अनुमति दी है।



परमेश्वर पापियों की प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं देता


कुछ पापी, यीशु पर विश्वास होने का दावा करने के बावजूद भी पर्वत पर चढ़कर निरंतर प्रभु का नाम पुकारने के द्वारा द्वारा अपने पापों को दूर करने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करते है। यहाँ तक की ठंडी और तूफानी रातों में भी वे अपने शरीर को प्लास्टिक से लपेटकर पर्वत पर चढ़ते है, और कई बार उन्हें डर भी लगता है फिर भी वे अपनी भक्ति से लगातार [प्रार्थना करते है। लेकिन उनकी प्रार्थना केवल आकाश में गूंजती रहती है।

भले ही वे पूरी रात प्रार्थना करते है, फिर भी उनके ऐसा विश्वास नहीं है जिससे परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर दे। विश्वास की न होने के बावजूद भी वे इतनी भक्ति से प्रार्थना करते है उसका यह कारण है की वे दूसरों को दिखाने के लिए प्रार्थना करते है, केवल एक प्रदर्शन की तरह। उनकी प्रार्थना बिना उत्तर की है। वास्तव में, वे अपने विवेक में जानते है की उनकी प्रार्थना परमेश्वर तक नहीं पहुँच रही, क्योंकि अभी तक उनके हृदय में पाप है। क्योंकि उन्हें अभी भी अपने पापों की माफ़ी पानी है, इसलिए उनकी बहुत सारी प्रार्थनाओं के उत्तर नहीं है, कोई फर्क नहीं पड़ता वे कितनी प्रार्थना करते है, रोते और विलाप करते है, अपनी पूरी आवाज के साथ चिल्लाते है, और परमेश्वर से वे जो चाहते है वो माँगने के लिए चाहे कुछ भी करते है।

उन्हें यह समझने की जरुरत है की परमेश्वर से प्रार्थना करने के लिए शर्त तब पूरी होती है जब वे पहले पाप की माफ़ी को प्राप्त करे। लेकिन क्योंकि बहुत सारे पापियों के पास जब तक वे पानी और आत्मा के सुसमाचार को जाने तब तक कोई दूसरा मार्ग नहीं है, इसलिए वे पापी के रूप में अपना जीवन जीते है। जब पापी प्रभु के द्वारा दिए गए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हृदय से विश्वास करने के द्वारा एक ही बार में हमेशा के लिए शुध्ध नहीं होते, तब तक उनकी सारी प्रार्थना व्यर्थ में जाति है। जब कभी भी पापी परमेश्वर से प्रार्थना करने की कोशिश करता है, तब उनके विवेक चिल्लाते है, “तुम्हें क्या लगता है तुम्हारी प्रार्थना परमेश्वर तक पहुचेगी? सपने देखते रहो! वे सब व्यर्थ है!” इसलिए जब वे परमेश्वर से प्रार्थान करना ज़ारी रखते है, “मुझे यह दो, मुझे वह दो,” उनकी प्रार्थना वास्तव में निरर्थक है।

“तुम मुझसे प्रार्थना करो उससे पहले, तुम अपने पापों की माफ़ी को प्राप्त करो।” यह परमेश्वर की इच्छा है। जब पाप की माफ़ी प्राप्त नहीं की है ऐसे लोग परमेश्वर से प्रार्थना करते है, तब वे अपने अनुभवों से समझते है की उनके विवेक उनके कारणों से मेल नहीं खाते। जब पापी प्रार्थना करते है, तब वे यह कहना ज़ारी रखते है, “प्रभु, मुझे यह दो, और मुझे वह भी दीजिए,” लेकिन उनकी प्रार्थना का कोई उत्तर नहीं है। इससे दूर, उनके विवेक उन्हें केवल यही कहते है, “बिलकुल नहीं! तुम्हारी प्रार्थना बिना उत्तर की रहेगी, क्योंकि तुम पापी हो!” जब कभी भी पापी अपने विवेक में धैर्य नहीं रख पाते, तब वे कैसे परमेश्वर को धोख़ा से सकते है, वे कैसे परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किए जा सकते है, और कैसे उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर मिल सकते है? पापी लोग परमश्वर से प्रार्थना करने के लिए लायक नहीं है। इससे दूर, उनके खुद के हृदय ही उनकी प्रार्थना पर संदेह करते है।



जब हम विश्वास से धर्मी बनते है तब हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर मिलना शुरू होता है


लेकिन जो लोग पहले पापी थे उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर मिलाना शुरू तब हुआ जब उन्होंने तम्बू के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा अपने पापों की माफ़ी पाई। जो लोग अपने हृदय में पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है उनके हृदय अपर्याप्त हो सकते है, लेकिन वे विश्वास से परमेश्वर के पास जा सकते है, और विश्वास से वे निडरता से परमेश्वर को प्रार्थना कर सकते है, उससे अपनी जरुरत पूरी करने के लिए कह सकते है। जब पाप की माफ़ी पाए हुए लोग परमेश्वर की इच्छा के अनुसार उससे प्रार्थना करते है, तब वे बड़ी निडरता से प्रार्थना करते है।

लकिन जब वे खुद की देह के लिए प्रार्थना करते है, तब उन्हें नामुनासिब लगता है। हम धर्मी तब बड़े आनंदित होते है जब हम पानी और आत्मा के सुसमाचार के प्रसार के लिए, दूसरों की आत्माओं के लिए प्रार्थना करते है। जब हम सुसमाचार के जल्दी प्रसार के लिए कोई भी दैहिक अवरोध के बिना प्रार्थना करते है, तब हम विश्वास के द्वारा हमारी सीमा के अवरोधों को जीत सकते है। लेकिन एक समय, जब हम इन अवरोधों को जित नहीं पाते तब बहुत परेशान हो जाते है। ऐसे समय में, हमें केवल प्रार्थना करनी है, और विश्वास करना है की परमेश्वर अन्त में उत्तर देगा। और इतना निश्चय होना है की परमेश्वर समय पर उत्तर देगा।

हमें प्रार्थना करनी है और इंतज़ार करना है, व्याकुल होकर यह नहीं सोचना है की क्यों हमारी प्रार्थना का उत्तर नहीं मिला। परमेश्वर चाहता है की हम विश्वास से प्रार्थना करे, और विश्वास करे की यदि हमारी प्रार्थना परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है तो फिर जब समय आएगा तब वह उसका उत्तर देगा। और जब हम विश्वास से पाप की माफ़ी प्राप्त करते है, और जब हम अपने जीवन में विश्वास से प्रार्थना करते है, तब हम यह अनुभव को देख पाते है की हमारी बहुत सारी प्रार्थना के उत्तर मिले है।

लेकिन क्या आप ऐसे विश्वास के साथ जीवन जीते है? यदि जीते है तो फिर आप सच में परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते है। जब हम एक ओर बार हमारी जाँच करते है, तब हमें समझ आता है की हम नरक के लिए बंधे हुए है, और हम एक बार ओर यह समझते है की हम केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास के द्वारा पाप की माफ़ी पाने के बाद ही प्रार्थना करने के लिए योग्य बन सकते है। उसी रूप से, हमें निश्चित रूप से यह याद रखना है की जो लोग प्रार्थना कर सकते है वे वो लोग है जिन्होंने यह विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी पाई है की प्रभु ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा उनके जीवनभर के सारे पापों को मिटा दिया है।

जो लोग अभी तक नया जन्म नहीं पाए उनमे, ऐसे कई सारे लोग है जो खुद पर घमंड करते है। आपके बारे में क्या? क्या आपके पास घमंड करने के लिए कुछ है? क्या आपके हाथ मजबूत है? क्या आपके पाँव मजबूत है? को फर्क नहीं पड़ता की हमारी देह कितनी मजबूत है, वे एक सामान्य सर्दी को भी नहीं जेल सकता, और वे किसी बड़े दबाव को भी सहन नहीं कर सकता, ये उनकी सच्ची कमजोरी है। क्या आपको समझ में आया की मनुष्य कितने कमज़ोर है? हम केवल एक मच्छर के काटने से या चलते समय पत्थर से टकराने के द्वारा मर सकते है। हम कुछ भी नहीं है। यदि कोई व्यक्ति एक शब्द भी ऐसा बोल दे जिससे हमारे अहंकार को चोट लगती है तब हमारे हृदय में इतनी पीड़ा होती है की हम अधमरे हो जाते है। क्या ऐसा नहीं है? निश्चित रूप से ऐसा ही है!

कितने लोग ६० साल की उम्र तक पहुँचने से पहले ही मर जाते है? ऐसे अनगिनत लोग है जो ३० साल की उम्र तक पहुँचने से पहले ही मर जाते है। ऐसे कमज़ोर प्राणी और कोई नहीं लेकिन मनुष्य है। अनंतकाल तक जीने वाले मनुष्य को कही भी पाया नहीं जा सकता। तो फिर क्या ऐसे कमज़ोर मनुष्यों को अपने मन को कठोर करना चाहिए और पानी और अपने हृदय में परमेश्वर के वचन पर विश्वास नहीं करना चाहिए? घमंड करने के लिए कुछ भी नहीं, मजबूत होने का ढोंग करने के लिए भी कुछ नहीं है – ऐसा ही है मनुष्य।

उसी रूप से, हमें खुद की कमजोरी को पहचानना चाहिए, हमारी अपर्याप्तता को और पाप को पहचानना चाहिए, अपने हृदय में नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से परिपूर्ण सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए, और इस प्रकार परमेश्वर को प्रार्थना करने की योग्यता प्राप्त करनी चाहिए। हमें परमेश्वर पर विश्वास होना चाहिए। हमारे हृदय में परमेश्वर को प्रसन्न करनेवाला विश्वास पाने के लिए, लोगों को पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए, लेकिन ऐसे कई लोग है जो अभी भी इस पर विश्वास नहीं करते। क्या आप पानी और आत्मा के सुसमाचार के आलावा दुसरे सुसमाचार से परमेश्वर से प्रार्थना करने का अधिकार प्राप्त कर सकते है? यीशु इस पृथ्वी पर आते और अपने बपतिस्मा से आपके पापों को नहीं उठाते तो क्या आपके पाप मिटते? क्या आप यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास किए बिना अपने हृदय के पापों को यीशु पर डाल सकते थे?

उत्तर है नहीं, ना, और बिलकुल नहीं! क्योंकि यीशु ने यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर जगत के पापों को अपने कंधो पर उठाया और उसने खुद के लहू को बहाकर सारे पापों के दण्ड को सहा। तो फिर क्या आप यीशु के बपतिस्मा और क्रूस के बगैर उद्धार पा सकते थे? बिलकुल नहीं! यीशु ने एक ही बार में हमेशा के लिए हमारे पापों को उठाने और उन्हें साफ करने के लिए बपतिस्मा लिया, हमारे पापों को शुध्ध करने के लिए। और हमारे पापों का दण्ड सहने के लिए वह क्रूस पर चढ़ा। पानी और आत्मा के सुसमाचार के सत्य पर विश्वास करने के द्वारा हमारे सारे पाप मिट जाते है।

इस प्रकार, हम किसी भी समय परमेश्वर के पास जा सकते है और अंगीकार कर सकते है, “प्रभु, मैं अपर्याप्त हूँ, लेकिन क्योंकि आपने मुझे अपने पानी और लहू से बचाया है, इसलिए अब मैं पापरहित हूँ। आप इस पृथ्वी पर आए, बपतिस्मा लेकर सारे पापों को ले लिया, जगत के इन पापों को क्रूस तक ले गए, उसकी वजह से दण्ड उठाया, और मृत्यु से फिर जीवित हुए। और ऐसा करने के द्वारा, प्रभु, अप वास्तव में मेरे उद्धार के परमेश्वर बन गए है। इस सत्य पर नेरे विश्वास के द्वारा मैं आप पर विश्वास करता हूँ।” दुसरे शब्दों में, जब हमारे विश्वास का पालन करते है, तब हम हमारी अपर्याप्तता के बावजूद भी परमेश्वर के पास जा सकते है और प्रार्थना कर सकते है। हम उसके राज्य की बढ़ोतरी के लिए प्रार्थना कर सकते है, हम हमारे भाइयों और बहनों के लिए प्रार्थना कर सकते है, और हम दूसरी प्रार्थनाओं के लिए भी प्रार्थना कर सकते है जिन्हें अभी भी पाप की माफ़ी पानी बाकी है।

जब लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है केवल तभी वे स्वर्ग के निचे बिना शर्म के रह सकते है। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर यह विश्वास न होने की वजह से, लोग खाली जगह को किसी ओर चीज के द्वारा भरने की कोशिश करते है – आपको समझना चाहिए की ऐसे प्रयास बिलकुल निरर्थक है। इसी लिए उनके हृदय व्याकुल और उत्पीड़ित है, उनका जीवन असह्य बनाते है। चाहे सच के ऊपर या झूठ पर, प्रत्येक लोग किसी ना किसी चीज पर विश्वास करना चाहते है। अपने बारे में भी सोचिए।

क्या सच में आप पानी और आत्मा के सुसमाचार के विश्वास के द्वारा प्रभु पर विश्वास करते है या आप पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते यह देखने के लिए खुद की जाँच करे। प्रभु ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा हमारे पापों को मिटाया है – यदिन आप इस पर विश्वास करते है, तो फिर क्या आपके हृदय में पाप होना चाहिए? यदि आप सच अपने हृदय की गहराई से पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है, तो निश्चित रूप से आपके अन्दर पाप नहीं है। इस सत्य पर अपने पूरे विश्वास के साथ, अब अपने पापों की माफ़ी को प्राप्त करे।

क्योंकि परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सत्य के द्वारा पाप की माफ़ी दी है, इसलिए हमने अब पाप कोई अनंतकाल की माफ़ी को प्राप्त किया है। और इसके कारण, जो लोग इस सत्य पर विश्वास करते है वे परमेश्वर की संतान बने है, अनुग्रह को पाया है जो उन्हें परमेश्वर के सामने जाने के लिए योग्य बनाता है। इसलिए, हमें एक दुसरे से प्रेम करना चाहिए, एक दुसरे की अपर्याप्तता को समझना चाहिए, अन्त तक परमेश्वर के कार्य की सेवकाई करनी चाहिए, और फिर उसके पास जाकर उसके सामने खड़े होना चाहिए।

जिन्होंने पाप की माफ़ी पाई है वे सब से प्रेम करते है। धर्मियों के मन यह इच्छा रखते है की सारे पापी नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य को जाने और नया जन्म पाए। लेकिन कुछ ऐसे प्रकार के लोग है जो वास्तव में किसी से प्रेम नहीं कर सकते। ये ज़िद्दी पापी है – मसीही जिन्होंने खुद के विवेक को धोख़ा दिया है और खुद को यह सोचने के द्वारा भ्रम में डाला है की वे पापी होने के बावजूद भी परमेश्वर में विश्वास करते है।

पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने और हमारे हृदय में पाप की माफ़ी पाने के द्वारा, हम सब को विश्वास के विवेक का बचाव करना चाहिए। आइए हम अन्त तक हमारे विश्वास की दौड़ को दौड़े, हमारे विश्वास के विवेक को थामे रहे और हमारे विश्वास को न गवाए। और जब कोई व्यक्ति आत्मिक तौर पर कठिन समय से गुजरता है, तब एक दुसरे की मदद करे और एक दूसरो को दृढ़ता से थामे रहे। कोई फर्क नहीं पड़ता की क्या हो रहा है, लेकिन धर्मी व्यक्ति को कलीसिया नहीं छोड़नी चाहिए। यदि धर्मी व्यक्ति कलीसिया को छोड़ता है, तब वे तुरंत मर जाते है। परमेश्वर की कलीसिया को छोड़ना मतलब खुद के घर को छोड़ना। अपने घर को छोड़ने का मतलब है अपने आश्रय को छोड़ना, और इसलिए आपका हृदय कही भी न तो आराम पाएगा और न तो सुख पाएगा, और आप अन्त में मर जाएंगे।

परमेश्वर की कलीसिया एक ऐसी जगह है जहाँ उसकी भेड़ों को खिलाया जाता है और आराम और राहत दी जाति है। उसी रूप से, जब भेड़ अपनी हिम्मत खो देती है और चिंतित होती है, तब परमेश्वर की कलीसिया उन्हें परमेश्वर के वचन सुनने के द्वारा उनके हृदय को फिर से हिम्मतवान बनने में मदद कराती है। जब आप अपने हृदय में विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर के वचन का स्वीकार करते है, तब आपके अन्दर का पवित्र आत्मा आनंदित होता है, आपका हृदय भी मजबूत होता है, और आख़री परिणाम स्वरुप आप अनन्त जीवन को प्राप्त करते है।

हम सब धर्मी परमेश्वर को अपना धन्यवाद देते है। हम प्रभु का धन्यवाद करते है, क्योंकि प्रार्थना करने के लिए काबिल बनने, उसने हमें पानी और आत्मा का सुसमाचार दिया। हाल्लेलूया! मैं जीवित परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ की वह हमें उस पर विश्वास करने और विश्वास के जीवन जीने के लिए योग्य बनाए।