The New Life Mission

बाइबल आधारित नियम

भाषा

कुछ बाइबल आधारित नियमों का संक्षेप में वर्णन

पानी और आत्मा के सुसमाचार से संबंधित

  • 1. फिरौती

    जायदाद या व्यक्ति को छुडाने के लिए मांगी हुई रकम को चुकाना. ऐसी चीजे छुडाने के लिए चुकाई जाने वाली किंमत या रकम. ज्यादातर छुटकारे के सकारात्मक प्रतिरूप के लिए दर्शाया जाता है (उदाहरण के तौर पर: निर्गमन २१:३०, ‘छूडौती’; गिनती ३५:३१-३२, यशायाह ४३:३, ‘फिरौती’). नए नियम में, मत्ती २०:२८ और मरकुस १०:४५ में फिरौती को “छूडौती” के रूप में दर्शाया गया है.

  • 2. प्रायश्चित

    सारे पापों को यीशु पर डालने की विधि. पुराने नियम में, बलि के सिर पर हाथ रखने के द्वारा उस पर मनुष्यजाति के सारे पापों को डालकर प्रायश्चित किया जाता था. नए नियम में, उसका मतलब है यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यीशु का बपतिस्मा. हिब्रू और ग्रीक भाषा में इस शब्द का मतलब है यीशु मसीह पर सारे पापों को डालना जिससे पापी परमेश्वर के साथ सच्चे संबंध में प्रवेश कर सके. नया नियम प्रायश्चित के बलिदान को अच्छी रीति से समझाता है: यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु. 
    पुराने नियम में: पुराने नियम में “प्रायश्चित” शब्द का प्रयोग तक़रीबन १०० बार किया गया है और हिब्रू भाषा में वह हमेशा ‘काफर’ (उदाहरण के तौर पर लैव्यव्यवस्था २३:२७, गिनती ५:८) के तौर पर दर्शाया गया है (सामान्य तौर पर ‘प्रायश्चित करना’ ऐसा लिखा गया है). प्रायश्चित हिब्रू भाषा के शब्द का अनुवाद है जो जीवित बकरे के सिर पर हाथ रखने के द्वारा उसके ऊपर पापों को डालने और इस्राएल के लोगों के सारे अपराधों को अंगीकार करनेका संकेत देता है (लैव्यव्यवस्था १६:२०-२१). 
    नए नियम में: प्रायश्चित अरामी शब्द ‘कप्र’ के साथ जुड़ा हुआ शब्द है जिसका मतलब होता है ढँक देना. इसका मतलब है नए नियम में यीशु के छुटकारे का बपतिस्मा. यीशु इस संसार में आए और सारी मनुष्यजाति के उद्धार को परिपूर्ण करने के लिए ३० साल की उम्र में बपतिस्मा लिया.

  • 3. बाइबल के अनुसार प्रायश्चित

    अ. पुराने नियम में, आम तौर पर पशु के बलिदान के द्वारा प्रायश्चित किया जाता था (उ.दा. निर्गमन ३०:१०, लैव्यव्यवस्था १:३-५, ४:२०-२१, १६:६-२२). 
    बी. नए नियम में, पुराने नियम के प्रायश्चित की सोच को मूल रीति से बरकरार रखा गया है, लेकिन सारी मनुष्यजाति का छूटकारा यीशु मसीह, परमेश्वर के बेटें के शरीर की बलि चढ़ाने के द्वारा ही परिपूर्ण हो सका. प्रेरित पौलुस ने कहा है की मसीह हमारे पापों के लिए मरा (१ कुरिन्थियों १५:३). 
    मासिक के मृत्यु के द्वारा केवल मूल पाप को दूर करने के लिए ही प्रायश्चित शब्द का प्रयोग नहीं किया गया, लेकिन सर्व मनुष्यों के सारे पापों को उठाने के लिए भी किया गया है. बपतिस्मा के द्वारा जगत के पाप अपने ऊपर डाले गए उसके बाद (मत्ती ३:१५), उसने क्रूस पर लहू बहाने के द्वारा मनुष्यजाति का उद्धार किया (लैव्यव्यवस्था १:१-५, यूहन्ना १९:३०). 
    प्रेरित पौलुस २ कुरिन्थियों ५:१४ में समझाता है की ‘एक सब के लिए मारा,’ उसके बाद, आगे के २१ वे वचन में, उसने कहा की वह ‘हमारे लिए’ था, और फिरसे गलातियों ३:१३ में कहता है, ‘हमारे लिए शापित बना’. नए नियम में केवल थोड़े ही वचन यीशु के बलिदान को दर्शाते है (उ.दा. इफिसियों ५:२): यूहन्ना १:२९, ३६ (‘मेम्ना’ – यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला) और १ कुरिन्थियों ५:७ (‘हमारा फसह’ – प्रेरित पौलुस). 
    हालाँकि, पौलुस स्पष्ट करता है की यरदन में यीशु का बपतिस्मा जगत के सारे पापों का प्रायश्चित था. वह रोमियों ६ में समझता है की यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यीशु के बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को यीशु पर डाला गया था. 
    वह आगे ओर समझाता है की यीशु का क्रूस पर चढ़ना पापों के लिए न्याय और मूल्य था, और प्रायश्चित का बलिदान सभी लोगों की आत्माओं के लिए अर्पण किया गया था. 
    यीशु का मृत्यु पुराने नियम में प्रायश्चित के बलिदान को सूचित करते परमेश्वर की योजना की अनुभूति है. पुराने नियम में हाथ रखना और नए नियम में यीशु का बपतिस्मा दोनों परमेश्वर के नियम के मुताबिक़ है (यशायाह ५३:१०, मत्ती ३:१३-१७, इब्रानियों ७:१-१०. १ पतरस ३:२१). 
    नया नियम यीशु के बपतिस्मा और मृत्यु से ख़त्म नहीं होता, लेकिन आगे हमें कहता है की मसीह में बपतिस्मा लेना उद्धार की परिपूर्णता है, जो हमारे पुराने मनुष्यत्व को उसके साथ मरने के लिए सक्षम बनाता है (रोमियों ६:३-७, गलातियों २:१९-२०). 
    वह हमें कहता है की जगत के सारे पाप यीशु पर डालने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने यीशु को बपतिस्मा दिया और परिणाम के तौर पर, उसे क्रूस पर लटका दिया गया. यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा केवल जगत के पापों को ही नहीं धोया, लेकिन हमें शैतान के समर्थ से भी छूडाया है और मनुष्यों के जगह पर उसने सज़ा को स्वीकार किया और पीड़ा सहन करने के द्वारा हमें परमेश्वर का सामर्थ वापस दिया है. 
    इसलिए, यीशु के छुटकारे ने पाप की समस्या को सुलझाया है जो लोगों को परमेश्वर के नजदीक जाने से रोकता था. यह महत्वपूर्ण घटना ने लोग और परमेश्वर के बिच में शान्ति और समन्वय को पुन:स्थापित किया, और साथ ही साथ उद्धार, आनन्द (रोमियों ५:११), जीवन (रोमियों ५:१७-१८), और छूटकारा (मत्ती ३:१५, यूहन्ना १:२९, इब्रानियों १०:१-१०, इफिसियों १:७, कुलुस्सियों १:१४) लाया.

  • 4. प्रायश्चित का दिन

    हिब्रू में, इस विषय का मतलब है ‘ढँकने’ या ‘समाधान’ का दिन. यहूदियों के लिए समसे महत्वपूर्ण दिन सातवें महीने का दसवां दिन यानी की प्रायश्चित का दिन (लैव्यव्यवस्था २३:२७, २५:९). हम लैव्यव्यवस्था १६ में देख सकते है की उस दिन दर्शाई गई विधि के अलावा महायाजक भी परमपवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकता था. 
    इस्राएल के लोगों के साथ साथ परमपवित्र स्थान को भी प्रायश्चित की आवश्यकता थी; इस तरह, बलिदान के सिर पर हाथ रखने के द्वारा पापों को उसके ऊपर डालने के लिए महायाजक को बलिदान चढ़ाना पड़ता था. प्रायश्चित के दिन इस्राएल के लोग परमेश्वर की पवित्रता और अपने पापों के बारे में सोचते थे. 
    उस समय, परमेश्वर को १५ अर्पण (जिसमें बकरा, १२ होमबलि, और ३ प्रायश्चित की बलि सम्मिलित होती है) बलिदान किया जाता था (लैव्यव्यवस्था १६:५-२९, गिनती २९:७-११). यदि हम गिनती २८:८ में दर्शाए ‘दुसरे मेमने’ की गिनती करे तो, १३ होमबलि और ४ प्रायश्चित के बलिदान है. 
    जिस दिन इस्राएल के लोग वार्षिक पापों के लिए प्रायश्चित करते थे वह सातवें महीने का दसवां दिन था. इसी निशानी के द्वारा, पूरी दुनिया के लिए प्रायश्चित का दिन जब यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यीशु ने बपतिस्मा लिया था वह दिन था. वास्तव में वह सारे मनुष्यों के लिए प्रायश्चित का दिन था. उस दिन परमेश्वर ने सारे जगत के पापों को धो दिया था (मत्ती ३:१३-१७). वह प्रायश्चित का दिन था जब परमेश्वर ने “ऐसे...सारी धार्मिकता को पूरा किया.”

  • 5. प्रायश्चित का बलिदान

    पुराने नियम में: दुसरे बलिदानों की तरह, सारे इस्राएल के लोगों के लिए पवित्रीकरण का बलिदान भी तम्बू के अन्दर किया जाता था. महायाजक खुद को साफ़ करता और विधि के लिए आम कपड़ों के बजाए सनी से बने पवित्र कपड़े पहिनता था, पापबलि के लिए एक बैल पसंद करता और अपने और अपने घराने के होमबलि के लिए भेड़ पसंद करता (लैव्यव्यवस्था १६:३-४). अपने लोगों के वार्षिक पापों को बलि पर डालने के लिए महायाजक बलि के सिर पर हाथ रखता था. 
    हाथ को रखना प्रायश्चित के दिन का सबसे महत्वपूर्ण भाग था. यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो बलिदान का अर्पण ग्रहण नहीं किया जाता क्योंकि सिर पर हाथ रखे बगैर पाप का प्रायश्चित पूरा नहीं गिना जाता था, ऐसे इस्राएल के लोगों के वार्षिक पापों को पापबलि पर डाला जाता था. 
    लैव्यव्यवस्था १६:२१ में, “और हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे पर रखकर इस्राएलियों के सब अधर्म के कामों, और उनके सब अपराधों, अर्थात् उनके सारे पापों को अंगीकार करे, और उनको बकरे के सिर पर धरकर उसको किसी मनुष्य के हाथ जो इस काम के लिये तैयार हो जंगल में भेजके छुड़वा दे.” 
    उसने लोगों से पापबलि के लिए दो बकरे लिए और होमबलि के लिए एक भेड़ ली। फिर वह तम्बू के द्वार के पास परमेश्वर के सामने दोनों बकरों को प्रस्तुत करता और एक ‘यहोवा के’ लिए और दूसरा ‘अजाजेल के’ लिए पसंद करने के लिए चिठ्ठिया डालता। 
    यहोवा के लिए पसंद किए हुए को पापबलि के रूप में अर्पण किया जाता था, और अजाजेल को वार्षिक पापों के प्रायश्चित के लिए यहोवा के सामने जीवित अर्पण किया जता था और फिर जंगल में छोड़ दिया जाता था (लैव्यव्यवस्था १६:७-१०)। 
    हाथ रखने के द्वारा इस्राएल के पापों को अजाजेल पर डाला जाता था। फिर अजाजेल को, जिसने इस्राएल के पापों को अपने सिर लिया है, उसे लोग और परमेश्वर के बिच शान्ति स्थापित करने के लिए जंगल में छोड़ दिया जाता था। ऐसे इस्राएल के वार्षिक पाप धुल गए थे। 
    इसी रीति से नए नियम में, यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला जो महायाजक हारून का आख़री वंशज था उसके द्वारा बपतिस्मा (पुराने नियम में हाथ रखना) लिया, और परमेश्वर के उद्धार को सम्पूर्ण करने के लिए बलिदान के मेमने के रूप में जगत के सारे पापों को उठा लिया (लैव्यव्यवस्था २०:२२, मत्ती ३:१५, यूहन्ना १:२९,३६)।  
    पुराने नियम में, चिठ्ठी डालने से पहले, हारुन अपने और अपने घराने के लिए पापबलि के लिए बछड़े को मारता था (लैव्यव्यवस्था १६:११)। फिर वह यहोवा के सम्मुख की वेदी पर के जलाते हुए कोयलों से भरे हुए धूपदान को लेकर, और अपनी दोनों मुट्ठियों को कुते हुए सुगन्धित धुप से भर कर, बीचवाले पर्दे के भीत ले आता। फिर उस धुप को यहोवा के सम्मुख आग में वो डालता जिससे साक्षीपत्र धुएँ से ढक जाए। वह बछड़े का लहू लेकर साक्षीपत्र के पूर्व में सात बार छिड़कता (लैव्यव्यवस्था १६:१२-१९)। 
    प्रायश्चित के दिन, बलि के सिर पर हारून के हाथ रखने को निकाल नहीं सकते। हारून बकरे के ऊपर हाथ रखता और इस्राएल के सारे पाप और अपराध बकरे के सिर पर डालता। फिर ठहराया हुआ मनुष्य बकरे को जंगल में ले जाता और उसे छोड़ देता। बकरा इस्राएल के पापों को उठाकर जंगल में भटकता और अन्त में उनके लिए मर जाता। यह पुराने नियम में प्रायश्चित का बलिदान था। 
    नए नियम में भी ऐसा ही है, लेकिन इसमे अजाजेल की जगह यीशु मसीह था, जिसने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिए और हमारे लिए क्रूस पर लहू बहाया और मर गया। 
    इसलिए अब, स्वर्गीय महायाजक यीशु मसीह के बपतिस्मा और क्रूस की मौत के बगैर सारे पापों से उद्धार नहीं मिल सकता। यह पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के उद्धार की परिपूर्णता है।

  • 6. हाथ रखना, स्थापित नियम

    पुराने नियम में पापबलि के ऊपर पापों को डालने की पध्धात्त परमेश्वर के द्वारा दी गई थी (लैव्यव्यवस्था ४:२९, १६:२१). पुराने नियम के दिनों में, तम्बू के अन्दर पापबलि के ऊपर हाथ रखने के द्वारा अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए परमेश्वर ने लोगों को अनुमति दी थी. वह नए नियम में यीशु के बपतिस्मा को प्रगट करने के लिए था.

  • 7. बपतिस्मा

    बपतिस्मा का मतलब है ① साफ़ होना ② गड़ाना (डूबना) और आत्मिक अर्थ में, ③ हाथ रखने के द्वारा पापों को उस पर डालना, जैसे पुराने नियम के दिनों में किया जाता था. 
    नए नियम में, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु का बपतिस्मा जगत के सारे पाप को धोने के लिए था. ‘यीशु के बपतिस्मा’ का मतलब है की सारे मनुष्यों के पापों को उठा लेना, और जगत के पापों को धो देना. 
    यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला जो सर्व मनुष्यों का प्रतिनिधि और हारून के वंश का महायाजक था उसके द्वारा बपतिस्मा लिया, और जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिए. यह उसके बपतिस्मा का उद्देश्य था. 
    ‘बपतिस्मा’ शब्द का मतलब है ‘पर डालना, गड़ाना’. इसलिए, “यीशु के बपतिस्मा” का मतलब है सारे पापों को यीशु पर डाले गए थे और हमारे बदले में उसका न्याय हुआ था. मनुष्यजाति को बचाने के लिए, अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को उठाना और उसके लिए मरना यीशु के लिए आवश्यक था. 
    इस तरह, उसका मृत्यु आपका और मेरा यानी की जगत के सारे पापियों का मृत्यु है, और उसका पुनरुत्थान सारे लोगों का पुनरुत्थान है. उसका बलिदान पापियों का उद्धार है, और उसका बपतिस्मा मनुष्यों के पाप धुल गए उसकी गवाही है. 
    बाइबल हमें बताती है की, “पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, अब तुम्हें बचाता है” (१ पतरस ३:२१). यीशु का बपतिस्मा हमारे पापों को धोने के द्वारा सारे मनुष्यों को बचाने के लिए न्यायी रास्ता है.

  • 8. पाप

    जो कुछ भी परमेश्वर का विरोध करता है वह पाप है. यह सब पापों को दर्शाता है, जिसमें मूल पाप और जीवनभर हमने किए सारे अपराध भी सम्मिलित ओतेह है. 
    ग्रीक में पा को ‘αμαρτία (हमारतीया) कहते है. और उसका शाब्दिक अर्थ ‘हमरतानो’ है, जिसका मतलब है ‘निशान चूक जाना.’ इसलिए, गलत तरीके से यीशु पर विश्वास करना सबसे गंभीर पाप है, और ऐसे उद्धार पाने की क्षमता नहीं रहती. सत्य को नहीं जानना और उस पर विश्वास न करना परमेश्वर के विरोध में अनाज्ञाकारीता और निन्दा का पाप करना है. 
    यदि हम परमेश्वर के सम्मुख में ऐसा पाप नहीं करना चाहते तो, हमें उसके वचनों को सच्ची रीति से समझना चाहिए और सत्य का एहसास होना चाहिए की यीशु हमारा उद्धारकर्ता बना है. 
    हम परमेश्वर के वचनों के द्वारा यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस पर विश्वास करना चाहिए. इसलिए परमेश्वर के वचनों का अस्वीकार करना सत्य से झूठे सिध्धांत की ओर विचलित होना है.
    बाइबल हमें बताती है की परमेश्वर ने जगत के सारे पापों को धो दिया है और इस पर विश्वास न करना सबसे गंभीर पाप है जो ‘मृत्यु की ओर लेकर जानेवाला पाप’ है (१ यूहन्ना ५:१६). हमें यीशु के जन्म में, अपने बपतिस्मा के द्वारा उसने पापों को धोया, और क्रूस पर के लहू के द्वारा हमें जीवन दिया है उसमे विश्वास करना आवश्यक है. यदि कोई लिखित वचन यानी की यीशु मसीह ने हमें हमारे पापों से मुक्त करने के लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मरा और पुनरुत्थित हुआ इसमें विश्वास नहीं करता तो वह पाप करता है.

  • 9. पश्चाताप

    जब परमेश्वर से दूर हुए व्यक्ति को अपने पापों का एहसास होता है और उसे साफ़ करने के बदले में यीशु का धन्यवाद करता है और परमेश्वर के पास वापस आता है, उसे पश्चाताप कहते है.
    हम सब पापों का ढेर है. निम्नलिखित सत्य को कबूल करना सच्चा पश्चाताप है: हम परमेश्वर के सम्मुख में पापी है, और इसलिए हम पूरा जीवन पाप करते है और जब हम मरेंगे तब नरक में जाएंगे; हमारे जैसे पापियों को बचाने के लिए यीशु इस जगत में आया ऐसा विश्वास करने क द्वारा हमें यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करना चाहिए, और उसने हमारे सारे पापों को उठा लिया (अपने बपतिस्मा के द्वारा), मर गया और हमें बचाने के लिए पुनरुत्थित हुआ. हमारे अपने विचारों को छोड़कर परमेश्वर के पास वापस लौटना ही सच्चा पश्चाताप है (प्रेरितों २:३८). 
    पश्चाताप यानी हमारे पापों को अंगीकार करना और परमेश्वर के वचन की ओर वापस मुड़ना, और हमारे पूरे हृदय से पानी और लहू के उद्धार का स्वीकार करना (१ यूहन्ना ५:६).
    सच्चा पश्चाताप यानी खुद को सम्पूर्ण पापी के रूप में कबूल करना और यीशु, परमेश्वर के पुत्र पर हमारे उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करना जिसने हमें सारे पापों से बचाया है. उद्धार पाने के लिए और हमारे सारे पापों से साफ होने के लिए, हमें हमारे कार्यो से पवित्र बनने के सारे प्रयास छोड़ देने चाहिए, और अंगीकार करना चाहिए की हम परमेश्वर और उसकी व्यवस्था के सम्मुख में सम्पूर्ण पापी है. उसके बाद हमें उसके उद्धार के सत्य, पानी और आत्मा के सुसमाचार का स्वीकार करना चाहिए, जो यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमें दी है. 
    एक पापी को अपने विचार और इच्छा को छोड़ देना चाहिए और पूर्णरीति से यीशु के पास वापस मुड़ना चाहिए. जब हम विश्वास करेंगे की यीशु का बपतिस्मा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठा ने के लिए था तब हम उद्धार पाएंगे. 
    दुसरे शब्दों में, यीशु के बपतिस्मा ने, उसकी क्रूस की मृत्यु ने, और उसके पुनरुत्थान ने सारे पापिओं के लिए परमेश्वर की धार्मिकता और उसके उद्धार को परिपूर्ण किया है. यीशु हमारे सारे पापों को धोने के लिए देह में आया, बपतिस्मा लिया और क्रूस पर लटका. इन सब पर विश्वास करना और उस पर विश्वास करनेवालों के लिए उद्धारकर्ता बनने के लिए यीशु पुनरुत्थित हुआ ऐसा विश्वास करना ही सच्चा पश्चाताप और वास्तविक विश्वास है.

  • 10. उद्धार

    मसीहियत में उद्धार का मतलब है ‘पाप के दण्ड के सामर्थ से छूटकारा पाना.’ जब हम अंगीकार करते है की हमारे पापों की वजह से हम नरक में जाएंगे और विश्वास करते है की यीशु ने अपने जन्म, बपतिस्मा और क्रूस के लहू के द्वारा हमें बचाया है तब हम उद्धार को प्राप्त करते है. 
    जो लोग यीशु के उद्धार, उसके बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करने के द्वारा पापरहित बने है वे ‘उद्धार पाए हुए, नया जन्म पाए हुए, और धर्मी’ कहलाते है. 
    हम ‘उद्धार’ शब्द का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए कर सकते है जिन्होंने यीशु पर विश्वास करने के द्वारा अपने सारे पापों से उद्धार पाया है जिस में मूल पाप और उनके हरदिन के पाप सम्मिलित है. जैसे डूबते हुए व्यक्ति को बचाया जाता है, वैसे ही जो व्यक्ति जगत के पापों में डूब रहा है वह यीशु के बपतिस्मा और लहू, आत्मिक सत्य के वचनों पर विश्वास करने के द्वारा यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने से बचाया जाएगा.

  • 11. नया जन्म पाना

    इसका मतलब है ‘दूसरी बार जन्म लेना.’ जब कोई पापी यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस पर विश्वास के द्वारा आत्मिक रीति से उद्धार पाता है तब वह नया जन्म पाया हुआ है. 
    हम यीशु के बपतिस्मा और लहू पे विश्वास करने के द्वारा आत्मिक रीति से नया जन्म पा सकते है. नया जन्म पाए हुए लोग अपने सारे पापों से साफ़ हुए लोग है “और जो लोग उसकी बाट जोहते हैं उनके उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप उठाए हुए दिखाई देगा” (इब्रानियों ९:२८).

  • 12. पापों की माफ़ी

    इस महत्वपूर्ण विषय को पापों की माफ़ी के रूप में पहचाना जाता है. पापों की माफ़ी तब मिलती है जब हम पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा एक ही बार हमेशा के लिए सारे पापों से साफ हो जाए. पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना यानी सत्य की इस शृंखला पर विश्वास करना: यीशु मसीह का इश्वरत्व, परमेश्वर के पुत्र का पृथ्वी पर आना, हमारे सभी के उद्धार के लिए उसका बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ना, और उसका पुनरुत्थान. 
    यीशु ने दिया हुआ छूटकारा उसके बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करने के द्वारा हम पा सकते है. जैसे पुराने नियम में भविष्यवाणी की गई थी की, यीशु खुद सारे लोगों को पाप से बचायेगा. बाइबल में छूटकारा यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू पर विश्वास के द्वारा पापों से साफ़ होने को दर्शाता है. सारे पाप यीशु पर डाले गए थे, इसलिए अब मनुष्यों के हृदय में कोई भी पापा नहीं है. 
    यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास करने के द्वारा हमारे सारे पापों को उसके ऊपर डालने के बाद ही हम खुद को छूटकारा पाए हुए और धर्मी कह सकते है.

  • 13. यीशु मसीह

    यीशु: ‘’उद्धारकर्ता जो सारे लोगों को उनके पापों से और पापों की सज़ा से बचाते है.’ यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में दर्शाया गया है, जिसने सारे लोगों को उनके पापों से बचाया है.
    मसीह: ‘’अभिषिक्त.’ व्यावसायिक पद पर तिन प्रकार के लोग थे जिनको परमेश्वर के सम्मुख अभिषिक्त होना पडा था: ① राजा ② भविष्यवक्ता और ③ याजक. यीशु ने इन सब को परिपूर्ण किया. 
    यीशु मसीह तीनो थे. उसने यह तीनो कार्य किए थे. हमें यीशु पे राजा के तौर पर, भविष्यवक्ता के तौर पर, और याजक के तौर पर विश्वास करना चाहिए जिसने हमें छुटकारा और उद्धार दिया. ऐसे हम उसे ‘यीशु मसीह’ कहते है. वह स्वर्गीय महायाजक था जिसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमें सारे पापों से बचाया. 
    इसलिए, वह उन सभी का राजा है जो उस पर विश्वास करते है. जब हम उसके सम्मुख में आते है तब वह हमें हमारे पापों का एहसास कराता है. उसने हमें सिखाया है की हम अपने पूर्वजो के समय से पापी है; इसलिए पापियों के वंशज के रूप में हम भी जन्म से पापी थे, और परिणाम स्वरुप हम परमेश्वर के न्याय के तले है. 
    उसने हमें ऐसा भी सिखाया है की उसके बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे पाप भी धुल गए है. उसने हम पापियों के लिए यह सब किया.

  • 14. परमेश्वर के नियम: दस आज्ञाए

    परमेश्वर की व्यवस्था में रोज़ाना जीवन से सम्बन्धी व्यवस्था की ६१३ धाराए है. लेकिन उनका सारांश दस आज्ञाए है, जो हमें परमेश्वर के सम्मुख पालन करनी है. उसमे आदेशों और प्रतिबन्ध है जैसे की “यह करो” और “यह मत करो.” उः जीवन जीने का मार्गदर्शन है और परमेश्वर की आज्ञाए हमें दी गई ताकि हमें हमारे पापों का एहसास हो. परमेश्वर की लिखित आज्ञाओं के द्वारा, हम जान सकते है की हम उसके प्रति कितने अनाज्ञाकारी है (रोमियों ३:१९-२०). 
    हमें हमारे पापों का एहसास कराने के लिए परमेश्वर ने हमें उसकी आज्ञाओं को दिया. हम कभी भी उसकी सारी आज्ञाओं का पालन नहीं कर सकते, इसलिए हमें नम्रता से वास्तविकता को स्वीकारना चाहिए की यीशु में विश्वास करने से पहले हम पापी थे. हम सब पापी है और परमेश्वर जानता है की हम कभी भी उसकी व्यवस्था के मुताबिक़ हमारा जीवन नहीं जी सकते. इसलिए, वह मनुष्य के रूप में इस जगत में आए, बपतिस्मा लिया और क्रूस पर उसका न्याय किया गया. उसकी आज्ञाओं के मुताबिक़ जीवन जीने की कोशिश करना घमंड का पाप है. हमें ऐसा नहीं करना चाहिए. 
    व्यवस्था हमें बताती है की परमेश्वर कितने सम्पूर्ण और पवित्र है, और हम मनुष्य वास्तव में कितने कमज़ोर है. दुसरे शब्दों में, परमेश्वर की पवित्रता और संपूर्णता परमेश्वर की व्यवस्था में प्रगट होता है.

  • 15. यरदन नदी, जहा यीशु को बपतिस्मा दिया गया था

    यरदन नदी तेजी से मृत सागर में बहती है. मृत सागर की सतह समुद्र के स्तर से ४०० मीटर निचे है. इसलिए, मृत सागर का पानी कही भी बह नहीं सकता; वह मृत सागर में ही बंधा हुआ रहता है. 
    मृत सागर का खारापन दुसरे साधारण समुद्र से १० गुना ज्यादा है, और वहाँ किसी भी जीवित चीज का अस्तित्व नहीं है. इसलिए, उसे मृत सागर कहा जाता है. यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा मृत्यु की नदी में (यरदन नदी) बपतिस्मा लिया था. यह दर्शाता है की जिनके हृदय में पाप नहीं है उनके अलावा सारे मनुष्यों का अन्त उनके पापों के लिए अनन्त विनाश का सामना करेंगे. 
    इसलिए, यरदन नदी पापों को धोने की नदी है, ऐसी नदी जहाँ पापियों की मौत हो जाति है. सारांश में, वह छुटकारे की नदी है जहाँ यीशु के बपतिस्मा से उसके ऊपर सारे पापों को डालने से जगत के सारे पापो धुल गए थे.